मैं : तुम कहाँ जा रहे हो?
वो : अपने दोस्तों के साथ
मैं : मुझे बताया नहीं तुमने
वो: वो . . . मैं . . . इतने सारे काम थे तो बताना भूल गया
( लम्बी ख़ामोशी )
वो: यार तुम्हारे साथ यही प्रॉब्लम है, तुम्हे अच्छा ही नहीं लगता की मैं अपने दोस्तों के साथ कहीं जाऊं. जब भी जाता हूँ कहीं बाहर उनके साथ तो तुम्हारा मुंह लटक जाता है
मैं : मैंने तो कुछ भी नहीं कहा
वो : तुम कहती नहीं हो, तुम्हारे चेहरे पे सब लिखा आता है
मैं : ओह्हो बाबा लेकिन मैं उस बात पे गुस्सा नहीं हूँ
वो : तो?
मैं : जानू मैं कब से इस वीकेंड का इंतज़ार कर रही थी, इतने दिनों बाद तो साथ में कुछ समय बिताने को मिल रहा है
वो : कहाँ समय है? तुम भी तो स्कूल जाओगी, कल भी तो तुम्हे सेशन लेने जाना है. मैं कल आजाऊंगा. तुम्हारी सन्डे को छुट्टी है न. . .
मैं : जानू लेकिन मैं हमेशा तुम्हारी छुट्टी वाले दिन सोचती हूँ की प्लीस भगवान जी आज एक ही क्लास हो और मैं जल्दी से घर वापस आ जाऊं.
वो : (गले लगते हुए ) आई ऍम सॉरी जानू. तुम बहुत अच्छी हो. आई लव यू .
मैं : हम्म . . .
वो: जानू हम लोग हो सकता है आज रात को ही आ जायें, नहीं तो कल सुबह तो आ ही जायेंगे. कोई आये या न आये, मैं तो आ जाऊंगा.
मैं: अच्छा अपना ख्याल रखना . आई लव यू. बाय.
(उसके जाने के बाद)
मैं : जानू मैं इस बात पे गुस्सा नहीं हूँ की तुम अपने दोस्तों के साथ गए. मुझे इस बात पे गुस्सा आया की तुमने मुझे बताना भी ज़रूरी नहीं समझा, यह जानते हुए भी की मैं तुम्हारी छुट्टी का कितनी शिद्दत से हफ्ते भर इंतज़ार करती हूँ. कितने प्लान्स बनती हूँ की तुम्हे यह बना के खिलाउंगी , तुम्हे वो बना के खिलाउंगी ,हम यह करेंगे, हम वो करेंगे और सारे प्लान्स पे जैसे खौलता तेल गिर जाता है.
मुझे इस बात पे गुस्सा आया की तुम्हारा परसों एग्जाम है और तुम घूमने जा रहे हो. मुझे इस बात पे गुस्सा आया की तुम इतनी दूर जा रहे हो पर फ़ोन भी नहीं ऑन करोगे. मुझे इस बात पर गुस्सा आया की पूरे दिन में तुमने सिर्फ एक बार ही फ़ोन किया.
मुझे इस बात पर गुस्सा आया की क्यूँ मैं यह भूल जाती हूँ की मैं तुम्हारी बीवी नहीं हूँ, सिर्फ एक दोस्त हूँ. इस बात पर भी गुस्सा आया की मैं तुमपे क्यूँ गुस्सा हो रही हूँ? क्या हक है मेरा तुमपे की तुमको रोकूँ ? आखिर तुम्हारी भी अपनी एक ज़िन्दगी है, अपने दोस्त हैं. मुझे इस बात पे गुस्सा आया की क्यूँ मैं तुमसे इतना प्यार करती हूँ की वो प्यार तुम्हारे पैरों की बेड़ियाँ बन गया है.
इस बात पे गुस्सा आया की क्यूँ मैं हमेशा अपनी औकात भूल जाती हूँ. इस बात पे गुस्सा आया की क्यूँ इस तरह की हरकत करती हूँ की उसके कहना पड़े " यू हैव बिकम पेन इन माय एस. . . " .
मुझे इस बात पे गुस्सा आया की मुझे क्यूँ दुःख हो रहा है जब मेरे इस प्यार भरे मेसेज पे की तुम कब घर पहुंचोगे तुम्हारा जवाब आया की "आशा करता हूँ की कभी घर न पहुंचूं ".
इस बात पे गुस्सा आया की मैं यह क्यूँ नहीं समझती की अब उसकी ज़िन्दगी में मुझसे बड़ा नासूर और दर्द कुछ भी नहीं. इस बात पे गुस्सा आया की मेरे अन्दर इतनी ताक़त क्यूँ नहीं है की मैं तुम्हारी ज़िन्दगी से चली जाऊं ताकि तुम चैन की सांस ले सको.
वो : अपने दोस्तों के साथ
मैं : मुझे बताया नहीं तुमने
वो: वो . . . मैं . . . इतने सारे काम थे तो बताना भूल गया
( लम्बी ख़ामोशी )
वो: यार तुम्हारे साथ यही प्रॉब्लम है, तुम्हे अच्छा ही नहीं लगता की मैं अपने दोस्तों के साथ कहीं जाऊं. जब भी जाता हूँ कहीं बाहर उनके साथ तो तुम्हारा मुंह लटक जाता है
मैं : मैंने तो कुछ भी नहीं कहा
वो : तुम कहती नहीं हो, तुम्हारे चेहरे पे सब लिखा आता है
मैं : ओह्हो बाबा लेकिन मैं उस बात पे गुस्सा नहीं हूँ
वो : तो?
मैं : जानू मैं कब से इस वीकेंड का इंतज़ार कर रही थी, इतने दिनों बाद तो साथ में कुछ समय बिताने को मिल रहा है
वो : कहाँ समय है? तुम भी तो स्कूल जाओगी, कल भी तो तुम्हे सेशन लेने जाना है. मैं कल आजाऊंगा. तुम्हारी सन्डे को छुट्टी है न. . .
मैं : जानू लेकिन मैं हमेशा तुम्हारी छुट्टी वाले दिन सोचती हूँ की प्लीस भगवान जी आज एक ही क्लास हो और मैं जल्दी से घर वापस आ जाऊं.
वो : (गले लगते हुए ) आई ऍम सॉरी जानू. तुम बहुत अच्छी हो. आई लव यू .
मैं : हम्म . . .
वो: जानू हम लोग हो सकता है आज रात को ही आ जायें, नहीं तो कल सुबह तो आ ही जायेंगे. कोई आये या न आये, मैं तो आ जाऊंगा.
मैं: अच्छा अपना ख्याल रखना . आई लव यू. बाय.
(उसके जाने के बाद)
मैं : जानू मैं इस बात पे गुस्सा नहीं हूँ की तुम अपने दोस्तों के साथ गए. मुझे इस बात पे गुस्सा आया की तुमने मुझे बताना भी ज़रूरी नहीं समझा, यह जानते हुए भी की मैं तुम्हारी छुट्टी का कितनी शिद्दत से हफ्ते भर इंतज़ार करती हूँ. कितने प्लान्स बनती हूँ की तुम्हे यह बना के खिलाउंगी , तुम्हे वो बना के खिलाउंगी ,हम यह करेंगे, हम वो करेंगे और सारे प्लान्स पे जैसे खौलता तेल गिर जाता है.
मुझे इस बात पे गुस्सा आया की तुम्हारा परसों एग्जाम है और तुम घूमने जा रहे हो. मुझे इस बात पे गुस्सा आया की तुम इतनी दूर जा रहे हो पर फ़ोन भी नहीं ऑन करोगे. मुझे इस बात पर गुस्सा आया की पूरे दिन में तुमने सिर्फ एक बार ही फ़ोन किया.
मुझे इस बात पर गुस्सा आया की क्यूँ मैं यह भूल जाती हूँ की मैं तुम्हारी बीवी नहीं हूँ, सिर्फ एक दोस्त हूँ. इस बात पर भी गुस्सा आया की मैं तुमपे क्यूँ गुस्सा हो रही हूँ? क्या हक है मेरा तुमपे की तुमको रोकूँ ? आखिर तुम्हारी भी अपनी एक ज़िन्दगी है, अपने दोस्त हैं. मुझे इस बात पे गुस्सा आया की क्यूँ मैं तुमसे इतना प्यार करती हूँ की वो प्यार तुम्हारे पैरों की बेड़ियाँ बन गया है.
इस बात पे गुस्सा आया की क्यूँ मैं हमेशा अपनी औकात भूल जाती हूँ. इस बात पे गुस्सा आया की क्यूँ इस तरह की हरकत करती हूँ की उसके कहना पड़े " यू हैव बिकम पेन इन माय एस. . . " .
मुझे इस बात पे गुस्सा आया की मुझे क्यूँ दुःख हो रहा है जब मेरे इस प्यार भरे मेसेज पे की तुम कब घर पहुंचोगे तुम्हारा जवाब आया की "आशा करता हूँ की कभी घर न पहुंचूं ".
इस बात पे गुस्सा आया की मैं यह क्यूँ नहीं समझती की अब उसकी ज़िन्दगी में मुझसे बड़ा नासूर और दर्द कुछ भी नहीं. इस बात पे गुस्सा आया की मेरे अन्दर इतनी ताक़त क्यूँ नहीं है की मैं तुम्हारी ज़िन्दगी से चली जाऊं ताकि तुम चैन की सांस ले सको.
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