पूरी रात इंतज़ार किया तुम्हारी साँसों को अपनी गर्दन पे महसूस करने का
सुबह हुई तो जाना की वो तो धूप निकलने से पहले ही शबनम बन कर उड़ गयीं
फिर सांझ ढले तक आँखों को दरवाज़े से सटाए रही
तुम्हारे क़दमों की आहट सुनने को बेताब
अपनी धडकनों को गिनकर वक़्त का अंदाजा लगाती रही
कुछ आवाज़ सुनी तो तुम्हारे ख्यालों के समंदर से इठलाती हुई बाहर आई
ओह ! तुम्हारा पैगाम आया है!
हम्म... देखूं तो तुमने क्या लिखा है?
"तुम अब मेरी ज़िन्दगी का वो पन्ना बन चुकी हो ,
जो फट जाये तो अच्छा...
नहीं रह पाउँगा अब तुम्हारे साथ
इसलिए मेरे घर आने का इंतज़ार मत करना"
सुबह हुई तो जाना की वो तो धूप निकलने से पहले ही शबनम बन कर उड़ गयीं
फिर सांझ ढले तक आँखों को दरवाज़े से सटाए रही
तुम्हारे क़दमों की आहट सुनने को बेताब
अपनी धडकनों को गिनकर वक़्त का अंदाजा लगाती रही
कुछ आवाज़ सुनी तो तुम्हारे ख्यालों के समंदर से इठलाती हुई बाहर आई
ओह ! तुम्हारा पैगाम आया है!
हम्म... देखूं तो तुमने क्या लिखा है?
"तुम अब मेरी ज़िन्दगी का वो पन्ना बन चुकी हो ,
जो फट जाये तो अच्छा...
नहीं रह पाउँगा अब तुम्हारे साथ
इसलिए मेरे घर आने का इंतज़ार मत करना"
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