कुछ दूर चल के जो साथ छोड़ देते हैं,
उनसे शिकवा नहीं कोई जो मुंह मोड़ लेते हैं।
चांदनी में तोह है सभी का हाथों में हाथ,
अमावस में साए अपने भी छोड़ देते हैं।
तुम्हारी बेवफ़ाई का हमें शिकवा नहीं कोई
फितरत है आपकी , के सबसे नाता तोड़ लेते हैं।
हर शक्स का, हर हाल में, एक अंदाज़ होता है,
कुछ फिर से टूटे हुए दिल के टुकड़े जोड़ लेते हैं॥
No comments:
Post a Comment